
आदिवासी युवाओं से एक सवाल – क्या हम सच में बाबा साहब को समझ पाए हैं?
आदिवासी युवाओं से एक सीधा सवाल करता है—क्या हम सच में बाबा साहब को समझ पाए हैं? अंबेडकर जयंती के उत्सव के बीच यह लेख शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक जिम्मेदारी और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है, और युवाओं को केवल उत्सव नहीं, बल्कि जागरूकता और परिवर्तन की राह चुनने के लिए प्रेरित करता है।



