Jagdalpur, Bastar, Chhattisgarh

बस्तर की धरती एक बार फिर सामाजिक जागरण और संगठनात्मक प्रतिबद्धता की साक्षी बनी। रविवार 01 मार्च को कोया कुटमा समाज भवन, परपा, जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग कर्मचारी/अधिकारी प्रभाग के संभागीय कार्यकारिणी का मनोनयन एवं शपथ ग्रहण समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

बस्तर संभाग के सातों जिलों से आए अधिकारी, कर्मचारी, युवा प्रतिनिधि और समाज के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया। यह आयोजन केवल पदभार ग्रहण का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक संगठित सामाजिक दिशा की सार्वजनिक घोषणा थी।

परंपरा और संविधान का शानदार संगम –

मनोनयन एवं शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी विधि-विधान के अनुरूप ‘सेवा अर्जी’ से हुई। गाँव गोसिन, जिमिदारीन माटी याया, मावली याया और पेन-पुरखा की आराधना ने वातावरण को आध्यात्मिक गंभीरता प्रदान की। इसके बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा भूमकाल के अमर योद्धाओं—गुंडाधुर, मडकामी मासा, झाड़ा सिरहा, हरचंद नाईक और जकरकन भतरा—के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया गया।

“बुढ़ाल पेन ता – सेवा सेवा” के जयघोष ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह संगठन परंपरा से जुड़ा है, लेकिन उसकी दिशा संविधान से निर्धारित होगी।

सर्वसमावेशी समाज –

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अन्य पिछड़ा वर्ग महासभा छत्तीसगढ़ के संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदु उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर, जिलाध्यक्ष गंगा नाग, जिला सचिव महेंद्र राणा, संभागीय सचिव धीरज राणा, जिला उपसचिव नारायण मौर्य, महिला प्रभाग संभागीय अध्यक्ष शारदा कश्यप, कोया कुटमा समाज कर्मचारी प्रकोष्ठ संभागीय अध्यक्ष हिड़मो वट्टी, पाड़ा पड़हा छत्तीसगढ़ के दीवान विपिन भगत और राजस्व पटवारी संघ जिलाध्यक्ष आनंद कश्यप सहित अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

धुरवा समाज के संभागीय अध्यक्ष एवं समाज के कोषाध्यक्ष पप्पु नाग तथा संरक्षक सोमारू कौशिक की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गंभीरता प्रदान की। यह सहभागिता बताती है कि कर्मचारी/अधिकारी प्रभाग केवल एक इकाई नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक संरचना का सक्रिय अंग है।

शपथ और जिम्मेदारी –

समारोह के मुख्य चरण में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। तिरु. डॉ. जीवन सलाम ने संभागीय अध्यक्ष के रूप में दायित्व ग्रहण किया। उनके साथ पूरी कार्यकारिणी ने संगठन के उद्देश्यों के प्रति समर्पित रहने का संकल्प दोहराया।

पारंपरिक रीति से ‘पागा’ बांधकर दायित्व सौंपना इस बात का प्रतीक था कि पद सम्मान नहीं, उत्तरदायित्व है। आदिवासी संस्कृति में पागा केवल वस्त्र नहीं, बल्कि विश्वास का बंधन है।

संगठन की वैचारिक दिशा

अपने संबोधन में डॉ. जीवन सलाम ने स्पष्ट कहा कि यह मंच किसी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बिखराव सीमित उपलब्धियाँ देता है, जबकि संगठन स्थायी परिवर्तन की नींव रखता है।

उन्होंने संगठन की आधारशिला को संवैधानिक अधिकारों, पेसा अधिनियम की आत्मा, वनाधिकार कानून के सम्मान और पुरखों की विरासत से जोड़ा। यह भी स्पष्ट किया कि यह मंच किसी राजनीतिक दल का विस्तार नहीं है, बल्कि संविधान की भावना पर आधारित सामाजिक पहल है।

संभागीय समन्वयक तिरु. हेमंत कुमार नाग ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सेवा संबंधी मुद्दों पर सहयोगात्मक पहल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी यदि एक साझा दृष्टि के साथ काम करें, तो समाज के अधिकारों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

नई कार्यकारिणी: जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन –

समारोह में नवगठित संभागीय कार्यकारिणी की घोषणा की गई।

क्रमांकपदनाम
1संभागीय अध्यक्षतिरु. डॉ. जीवन सलाम
2उपाध्यक्षतिरु. शारदा कश्यप
  तिरु. मासा राम कुंजाम
  तिरु. अमर मरकाम
3महासचिवतिरु. राजेंद्र बघेल
4संभागीय समन्वयकतिरु. हेमंत कुमार नाग
5कोषाध्यक्षतिरु. किशोर कुमार मंडावी
6सह-कोषाध्यक्षतिरु. प्रभु लाल नाग
7संयुक्त सचिवतिरु. पांडू वट्टी
  तिरु. रतनी नुरेटी
  तिरु. पूनम नेताम
  तिरु. नोमेश पिढ़ा
8मीडिया प्रभारीतिरु. नारायण सिंह मौर्य
9संभागीय प्रवक्तातिरु. पवन नेताम
  तिरु. तुलसी ठाकुर
10सलाहकारतिरु. माखन लाल सोरी
  तिरु. विपिन चन्द्र भगत
11आईटी सेल हेडतिरु. महेंद्र कश्यप
12कार्यकारिणी सदस्यतिरु. कुलधर गोयल
  तिरु. नरेश मरकाम
  तिरु. शोभा राम नाग
  तिरु. याकूब तिर्की
  तिरु. डी.एस. नेताम
  तिरु. राखी गोटा

युवा प्रभाग अध्यक्ष संतु मौर्य ने भी संगठन के साथ समन्वय में कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। यह संकेत है कि संगठन केवल वर्तमान नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी समान रूप से साथ लेकर चलेगा।

कर्मचारी/अधिकारी प्रभाग की भूमिका

कई वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कर्मचारी और अधिकारी किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं। यदि वे संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए एकजुट होकर कार्य करें, तो प्रशासनिक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव संभव है। बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहाँ सामाजिक-सांस्कृतिक प्रश्न अक्सर विकास की बहस से जुड़ जाते हैं, वहाँ इस प्रकार का संगठित मंच संवाद और समाधान दोनों की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

संगठित सामाजिक संदेश –

यह समारोह केवल शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं रहा। इसने एक संदेश दिया कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास अनिवार्य हैं।

समापन पर सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया और समाज के सशक्त, जागरूक और संगठित भविष्य के निर्माण का संकल्प दोहराया गया।

बस्तर की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमा से नहीं, बल्कि उसकी सामूहिक चेतना से बनती है। कर्मचारी/अधिकारी प्रभाग का यह गठन उसी चेतना को संगठित स्वर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।