
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 – कोयतुरीय विश्लेषण।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 – कोयतुरीय विश्लेषण – जानें कैसे यह नया कानून कोयतुर पुरखा शक्तियों, रूढ़िगत परंपराओं और ‘धर्मपूर्वी’ पहचान की रक्षा करेगा।
Jagdalpur, Bastar, Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 – कोयतुरीय विश्लेषण – जानें कैसे यह नया कानून कोयतुर पुरखा शक्तियों, रूढ़िगत परंपराओं और ‘धर्मपूर्वी’ पहचान की रक्षा करेगा।

आदिवासी संघर्ष: दिशा, दशा और समाधान – “हम आदिवासी इस देश के कुदरती मालिक हैं, फिर भी सबसे अधिक पीड़ित और शोषित क्यों हैं? एक गहन और तथ्यात्मक विश्लेषण। पढ़ें आदिवासी समाज की समस्याओं का वास्तविक समाधान।”

आदिवासी जंगल का रखवाला – छत्तीसगढ़ के अरण्यों से निकली एक पुकार। जानिए कैसे आदिवासी समुदाय जल-जंगल-जमीन की रक्षा कर रहा है और विकास की अंधी दौड़ में क्या खो रहा है। एक मार्मिक और विश्लेषणात्मक लेख।

कोयतुर समुदाय के आराध्य गुरु लिंगो पेन का विश्व प्रसिद्ध करसाड़ 2, 3 और 4 अप्रैल 2026 को अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम वल्लेकनार्र, आमाबेड़ा (कांकेर) में आयोजित होगा। इसमें छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से गोंडीयन समाज और शोधार्थी शामिल होंगे।

जगदलपुर के भतरा समाज भवन में सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 समारोह में मातृ शक्ति का सम्मान, सामाजिक एकता और आदिवासी परंपराओं का गौरवपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग कर्मचारी/अधिकारी प्रभाग का मनोनयन एवं शपथ ग्रहण समारोह संपन्न।

आदिवासी संघर्ष: दिशा, दशा और समाधान – “हम आदिवासी इस देश के कुदरती मालिक हैं, फिर भी सबसे अधिक पीड़ित और शोषित क्यों हैं? एक गहन और तथ्यात्मक विश्लेषण। पढ़ें आदिवासी समाज की समस्याओं का वास्तविक समाधान।”

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मेसा बिल (ड्राफ्ट) अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाओं के प्रावधान लागू करने का एक प्रस्तावित कानून था, जिसका उद्देश्य शहरी विकास के साथ आदिवासी अधिकारों और स्थानीय स्वशासन के संतुलन को बनाए रखना था।

यदि जातिगत भेदभाव नहीं तो UGC Guidelines 2026 से डर कैसा? – UGC Guidelines 2026 को लेकर अकादमिक जगत में खलबली क्यों है? सवाल सीधा है—अगर वास्तव में जातिगत भेदभाव नहीं होता, तो जवाबदेही का डर कैसा? पढ़िए, कैसे ये नई गाइडलाइन्स कैंपस के ‘अदृश्य जातिवाद’ और मेरिट के नाम पर चल रहे विशेषाधिकार पर रोशनी डाल रही हैं।

आदिवासी आज भी न्याय से दूर क्यों? इस लेख में हम सामाजिक भेदभाव, प्रशासनिक लापरवाही, कानून की जटिलता और अधिकारों की अनदेखी जैसे कारणों को गहराई से समझेंगे और समाधान की दिशा भी देखेंगे।

भारत का सामाजिक ताना-बाना जाति व्यवस्था के इतिहास से अनछुआ नहीं रहा है। विशेषकर 19वीं सदी के समाज सुधारकों—महात्मा ज्योतिबा

“डॉ. भीमराव अंबेडकर” डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन न केवल एक प्रेरणा है, बल्कि वह संघर्ष, आत्मबल और सामाजिक