
गण्डोदीप: कोयतुर सभ्यता, दर्शन और आदिम चेतना का महावृत्तांत ।
सेवा जोहार! जय सेवा! जय जोहार! जय गण्डोदीप! काल के कपाल पर अंकित एक विस्मृत नाम सृष्टि के विकासक्रम

सेवा जोहार! जय सेवा! जय जोहार! जय गण्डोदीप! काल के कपाल पर अंकित एक विस्मृत नाम सृष्टि के विकासक्रम

“तुम्बा शिल्प बस्तर की पारंपरिक आदिवासी कला है जिसमें सूखी लौकी पर नक्काशी कर लैंपशेड, ज्वेलरी और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। तुम्बा शिल्प का इतिहास, प्रक्रिया और सांस्कृतिक महत्व विस्तार से जानिए।”

मेसा बिल (ड्राफ्ट) अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिकाओं के प्रावधान लागू करने का एक प्रस्तावित कानून था, जिसका उद्देश्य शहरी विकास के साथ आदिवासी अधिकारों और स्थानीय स्वशासन के संतुलन को बनाए रखना था।

यदि जातिगत भेदभाव नहीं तो UGC Guidelines 2026 से डर कैसा? – UGC Guidelines 2026 को लेकर अकादमिक जगत में खलबली क्यों है? सवाल सीधा है—अगर वास्तव में जातिगत भेदभाव नहीं होता, तो जवाबदेही का डर कैसा? पढ़िए, कैसे ये नई गाइडलाइन्स कैंपस के ‘अदृश्य जातिवाद’ और मेरिट के नाम पर चल रहे विशेषाधिकार पर रोशनी डाल रही हैं।

आदिवासी आज भी न्याय से दूर क्यों? इस लेख में हम सामाजिक भेदभाव, प्रशासनिक लापरवाही, कानून की जटिलता और अधिकारों की अनदेखी जैसे कारणों को गहराई से समझेंगे और समाधान की दिशा भी देखेंगे।

पत्थलगड़ी-स्मृति स्तंभ,गणराज्य सीमा,स्वशासन, आदिवासी परंपरा में सिर्फ यादगार नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और गांव के स्वशासन का प्रतीक है।
(फोटो – ओम सोनी जी) बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य ईश्वर की अनुपम सौगात है जो राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर के
भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर संभाग अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की जनजातियाँ
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