Jagdalpur, Bastar, Chhattisgarh

Table of Contents

बस्तर की पारंपरिक शिल्प कला।

छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित बस्तर(जिसे प्यार से हम प्यार से  ‘आमचो बस्तर’ कहते हैं) न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और कल-कल बहती इंद्रावती के लिए जाना जाता है, बल्कि यह अपनी समृद्ध ‘पुरखौती’ विरासत और अद्वितीय शिल्प कला के लिए भी पूरी दुनिया में विख्यात है। यहाँ की कला केवल मनोरंजन, ‘देखावा’ या घर की सजावट का साधन नहीं है; यह तो यहाँ के ‘आदिवासी’ भाई-बहनों के जीवन दर्शन का दर्पण है।

यहाँ का हर एक शिल्प, हर एक गूँज और हर एक आकार आदिवासियों के ‘करसाड’, उनकी आस्था और प्रकृति के प्रति उनके ‘मया’ (प्रेम) का एक जीवंत दस्तावेज है। बस्तर का जनमानस प्रकृति को केवल संसाधन नहीं मानता, बल्कि उसे अपना ‘पेन-पुरखा’ (देवता और पूर्वज) मानता है। यहाँ के ऊँचे-ऊँचे ‘सरगी’ (सागौन/साल) के पेड़, पहाड़ और नदियाँ केवल भूगोल का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ के लोक-जीवन के अभिन्न अंग हैं।

जब एक कलाकार अपनी उंगलियों से किसी आकृति को गढ़ता है, तो वह वास्तव में अपनी ‘संस्कृति’ को सहेज रहा होता है। उसके भीतर अपने ‘गोत्र’, अपने ‘देव-गुड़ी’ और अपने पुरखों की कहानियों के प्रति जो गहरी श्रद्धा है, वही उसकी कला में उतर आती है। यह कला उनके ‘घोटुल’ की सीख, उनके ‘मड़ई’ के उल्लास और जंगलों के साथ उनके सदियों पुराने सह-अस्तित्व की कहानी बयां करती है। संक्षेप में कहें तो, बस्तर की यह भूमि और यहाँ की कला, मनुष्य और कुदरत के बीच उस ‘अगाध विश्वास’ का प्रतीक है, जो आधुनिक दुनिया की चकाचौंध से दूर आज भी अपनी मौलिकता और सादगी को सहेजे हुए है।

बस्तर की शिल्प कला केवल वस्तुओं का निर्माण नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक साधना है। आज वैश्विक स्तर पर इन कलाकृतियों की भारी माँग है, जिसने स्थानीय कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। हालांकि, आधुनिकता के दौर में इन पारंपरिक विधाओं को संरक्षित रखना एक चुनौती है। बस्तर का हस्तशिल्प हमें सिखाता है कि कैसे न्यूनतम संसाधनों और असीम धैर्य के साथ प्रकृति का सम्मान करते हुए सौंदर्य का सृजन किया जा सकता है। यह कला भारतीय विरासत का एक अनमोल रत्न है, जो अपनी सादगी और जीवंतता से आज भी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर रही है।

बस्तर के शिल्प की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रकृति-आधारित होना है। यहाँ का कलाकार बाज़ार की माँग के अनुसार नहीं, बल्कि अपने परिवेश और लोक परंपराओं के अनुसार सृजन करता है। महुआ के फूल, साल के वृक्ष, गौर पक्षी के पंख और माड़िया आदिवासियों का प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ इन कलाकृतियों के मुख्य विषय होते हैं। यह कला आदिम संस्कृति को आधुनिक दुनिया से जोड़ने वाले एक सेतु के समान है।

आज हम इस लेख में बस्तर की पारंपरिक शिल्प कलाओं के बारे में संक्षिप्त में बात करते हैं।

बस्तर की पारंपरिक शिल्प कलाओं की सूची

  1. ढोकरा शिल्प (घड़वा कला) – मोम क्षय विधि से बनी धातु की मूर्तियाँ
  2. लौह शिल्प – गर्म लोहे को कूटकर बनाई गई कलाकृतियाँ
  3. काष्ठ कला – लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी
  4. टेराकोटा (मृदा शिल्प) – मिट्टी के पारंपरिक हाथी, घोड़े और बर्तन
  5. तुमा शिल्प – सूखे लौकी (तुमा) पर की गई नक्काशी
  6. बांस शिल्प – बांस से बनी टोकरियाँ, चटाई और सजावटी सामान
  7. सिसल शिल्प – सिसल के रेशों से बनी वस्तुएं
  8. कोसा सिल्क – प्राकृतिक रेशम से बने वस्त्र
  9. गोदना कला – शरीर और कपड़ों पर पारंपरिक चित्रकारी
  10. पत्थर शिल्प – पत्थरों को तराश कर बनाई गई मूर्तियाँ
     
    आईये इन शिल्प कलाओं को संक्षिप्त में एक-एक करके समझते हैं –

1. ढोकरा शिल्प

बस्तर की सबसे विशिष्ट पहचान ढोकरा शिल्प है, जिसे ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ (Lost Wax Casting) विधि से बनाया जाता है। इसमें मोम और मिट्टी के उपयोग से बेलमेटल (कांसा) की सुंदर आकृतियाँ ढाली जाती हैं। इन मूर्तियों में देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और दैनिक जीवन के दृश्यों को इतनी बारीकी से उकेरा जाता है कि वे सजीव प्रतीत होती हैं।

2. लौह शिल्प (Iron Craft)

लौह शिल्प (Iron Craft) की बात करें तो यह बस्तर के लोहारों की अद्भुत कल्पनाशीलता का प्रमाण है। वे भट्टी में तपते लोहे को कूट-कूट कर सुंदर ‘दीया’, ‘टोंगरी’ और हिरणों की कलाकृतियाँ बनाते हैं। विशेष बात यह है कि इन कलाकृतियों में जोड़ (Joints) नहीं दिखाई देते, जो कारीगरों की निपुणता को दर्शाता है।

!! SHARE THIS TO YOUR LOVED ONES !!

!! आपके विचार, सुझाव, प्रशंसा सादर आमंत्रित हैं !!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बस्तरिया बाबू

बस्तरिया बाबू

बस्तर की जनजातीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक जीवन पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक। उनके लेख बस्तर के आदिवासी समाज की परंपराओं, पेन-परब संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन मुद्दों को समझने का प्रयास करते हैं।

🌐 bastariyababu.in