Jagdalpur, Bastar, Chhattisgarh

द टाइगर बॉय – चेंदरू

Table of Contents

छत्तीसगढ़ राज्य के संभाग बस्तर में मोगली के नाम से प्रसिद्ध एवं द टाइगर बॉय के नाम से पुरे विश्व में प्रसिद्ध चेंदरू मंडावी बस्तर संभाग और पुरे भारतवर्ष सहित पुरी दुनिया के लिये किसी अजुबे से कम नही थे | चेंदरू मण्डावी वही शख्स थे, जो बचपन में हमेशा बाघ के साथ ही खेला करते थे और उसी के साथ ही अपना अधिकतर समय बिताते थे। चेंदरू पुरी दुनिया में 60 के दशक में बेहद ही मशहुर थे, इनके जीवन का सबसे अच्छा पहलू उसकी टाइगर से दोस्ती, वह हमेशा दोनों एक साथ ही रहते थे, साथ में खाना, साथ में खेलना, साथ में सोना सब साथ-साथ ही होता था

 

%E0%A4%A6 %E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%97%E0%A4%B0 %E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AF %E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%82 The Tiger Boy Chendru 1

 

प्रारंभिक जीवन :-

 
चेंदरू मंडावी, बस्तर संभाग के अबूझमाड़ जिला नारायणपुर के आदिवासी बाहुल्य ग्राम गढ़बेंगाल का रहने वाले थे | इनके पिता और दादा भी एक शिकारी थे, बस्तर की इस प्रतिभाशाली गौरवगाथा की याद में छत्तीसगढ़ सरकार ने नया रायपुर के जंगल सफारी में चेंदरू का स्मारक बना कर सच्ची श्रध्दान्जली दी है।
 

23 11 2019 adivasi bastar 20191123 143814
एक खास मुलाक़ात :-
 
 
एकं दिन की बात है, चेंदरू के दादा एवं उनके पिता जंगल से शिकार के बाद बांस की टोकरी में इनके लिए एक तोहफा लेकर आये | बांस की टोकरी में छुपे तोहफे को देखने चेंदरू का मन बड़ा ही उत्साहित था और वह तोहफा था दोस्ती का था जिसने चेंदरू का जीवन बदल दिया | 

 

chendaru boy1

chendru tarzan boy bastar
चेंदरू के सामने जब वह बांस की टोकरी खोली गयी तो उन्हें टोकरी में में नन्हा शावक मिला, वह एक बाघ का छोटा बच्चा था | बाघ के नन्हे से छोटे बच्चे को देख चेंदरू के आँखों में सहसा अलग ही चमक दिखी, उन्होंने तत्काल उसे अपने गले से लगा लिया और यही इनकी और बाघ की खास मुलाकात थी और यहीं से इनकी प्रसिद्ध दोस्ती की शुरुआत हुयी जिसे भारत ही नहीं वरन पूरा विश्व कायल हुआ |
 
बचपन का प्यार और दोस्ती:- 
चेंदरू ने अपने नन्हे मित्र का नाम रखा था टेम्बू | चेंदरू हमेशा टेम्बू के साथ गांव-गाँव, जंगल-जंगल और नदी-नालों में साथ-साथ घूमते व नदी में मछलियां पकड़ते थे | खेलते – खेलते कभी कभी जंगल में इनकी जोड़ी में कभी-कभी तेंदुए भी मिल जाते थे तो वह भी इनके साथ खेलता था | सुबह से शाम तक गाँव में , जंगल में इन दोनों की धमा-चौकड़ी प्राय देखने को मिलता ही था | शाम को थक हार कर जब दोनों घर पहुँचते तो घर में इनकी माता गरम-गरम चावल और मछली की सब्जी परोस देती थी | इस प्रकार से इन दोनों का दैनिक जीवन रात की गहराई में आराम किया करता था | 

 

%E0%A4%A6 %E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%97%E0%A4%B0 %E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AF %E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%82 The Tiger Boy Chendru

वैश्विक प्रसिद्धी :-
 
चेंदरू और बाघ की दोस्ती का किस्सा धीरे-धीरे पुरे गांव गांव में फैलने लगा फिर पुरे बस्तर क्षेत्र में इनकी कहानियां गूंजने लगी थी | इसी प्रकार से एक दिन इनकी कहानियां विदेश भी पहुँच गयी | स्वीडन के सुप्रसिद्ध फिल्मकार और डायरेक्टर अरने सक्सडोर्फ ( Astrid Bergman Sucksdorff ) को जब इन दोनों की दोस्ती का पता चला तो पुरे साजो-सामान के साथ बस्तर आ पहुंचे। यहाँ आने के बाद उन्होंने एक ऐसा दृश्य देखा जो कि उनके लिए इससे पहले कल्पना मात्र था, उन्होंने देखा कि एक इंसान और एक बाघ एक दूसरे के दोस्त हैं और उनके बीच गहरी दोस्ती है | ऐसा आश्चर्य और जीवंत दृश्य देख फ़िल्मकार और डायरेक्टर अरने सक्सडोर्फ इनकी मित्रता को पूरी दुनिया को दिखाने का फैसला कर लिया।

 

hollywood heero

बस्तर से हॉलीवुड का सफ़र:-
फ़िल्मकार और डायरेक्टर अरने सक्सडोर्फ चेंदरू और बाघ की दोस्ती से प्रभावित होकर सन 1957 में चेंदरू और बाघ मित्र को लेकर एक फिल्म बनाया जिसका नाम द फ्लूट एंड द एरो ( The Flute And The Arrow ). जिसे भारत मे एन द जंगल सागा ( En The Jungl Sagae ) नाम से रिलीज़ किया गया था | अरने सक्सडोर्फ की यह  फ़िल्म अंतराष्ट्रीय स्तर पर खूब सफल रही थी और इस फिल्म ने पूरी दुनिया में धूम मचा दिया था।

 

the jungle saga

अरने सक्सडोर्फ ने इस फिल्म में चेंदरू और बाघ मित्र के साथ की दोस्ती के बारे में दिखाया गया था, इस फिल्म के हीरो का रोल भी चेंदरू ने ही किया था | अरने सक्सडोर्फ ने चेंदरू के गाँव में रहकर लगातार 02 साल में फिल्म की  शूटिंग पूरी की, और उनकी इस फिल्म ने उन्हें और चेंदरू दोनों को दुनिया भर में मशहूर कर दिया | 75 मिनट की फिल्म एन द जंगल सागा जब पुरे यूरोपी देशों के सेल्युलॉईड फिल्म  (Celluloid Film) परदे पर चली तो लोग चेंदरू के दीवाने हो गए और  चेंदरू रातों-रात हालीवुड स्टार हो गया।
विदेश ( स्वीडन ) का सफ़र:- 
 
अरने सक्सडोर्फ फिल्म की सफलता के बाद चाहते थे कि चेंदरू को अपना देश दिखायें जहाँ से वे आये थे | फिर उन्होंने चेंदरू से बात कर उसे स्वीडन ले गए। चेंदरू के लिये स्वीडन और वहां का परिवेश विचित्र और अलग था लेकिन अरने सक्सडोर्फ ने चेंदरू को एक परिवार का माहौल दिया, उसे अपने घर पर ही रखा और अरने सक्सडोर्फ की पत्नी अस्त्रिड सक्सडोर्फ ( Astrid Sucksdorff ) ने चेंदरू को अपने बेटे की तरह प्यार दिया और उसकी देखभाल भी किया | अस्त्रिड सक्सडोर्फ भी एक सफल फोटोग्राफर थी, फ़िल्म शूटिंग के दौरान उन्होंने चेंदरू की कई तस्वीरें खीची और एक किताब भी प्रकाशित की चेंदरू – द बॉय एंड द टाइगर ( Chendru – The Boy And The Tiger ) | स्वीडन में चेंदरू ने करीबन एक साल तक स्वीडन का जीवन जिया, इन एक सालों में उन्होंने बहुत सारे प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, फ़िल्म स्क्रीनिंग की, और अपने चाहने वालो से मिला।

 

FAREWELL

बस्तर वापसी और देहावसान :- 
स्वीडन में  एक साल रहने के बाद चेंदरू वापस स्वदेश लौटे और मुंबई पहुँच कर उनकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से हुई | प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने चेंदरू को पढ़ने के लिये कहा, पर चेंदरू के पिता ने उसे वापस गढ़बेंगाल बुला लिया |चेंदरू के बस्तर वापस आने के कुछ दिनों बाद उनका प्यारा बाघ मित्र, बचपन का साथी – टेम्बू  चल बसा। टेम्बू के जाने के बाद चेंदरू के जीवन में उदासी छाने लग गयी और चेंदरू उदास रहने लगा | धीरे-धीरे चेंदरू अपनी पुरानी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में लौटा लेकिन टेम्बू के बिना जीवन रास नहीं आया | उन्होंने खुद को सीमित कर लिया और गुमनामी का जीवन जीते-जीते  गुमनाम हो गए। 

 

chendru tarzan boy bastar death stage

गुमनामी की ज़िंदगी जीते सन 2013 में लम्बी बीमारी से जूझते हुए बस्तर के विश्व प्रसिद्ध और भारत के पहले हॉलीवुड स्टार की मौत हो गयी । आज भी उनकी और बाघ की दोस्ती की कहानी बस्तर संभाग के घर-घर में गूंजती है |

!! SHARE THIS TO YOUR LOVED ONES !!

!! आपके विचार, सुझाव, प्रशंसा सादर आमंत्रित हैं !!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बस्तरिया बाबू

बस्तरिया बाबू

बस्तर की जनजातीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक जीवन पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक। उनके लेख बस्तर के आदिवासी समाज की परंपराओं, पेन-परब संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन मुद्दों को समझने का प्रयास करते हैं।

🌐 bastariyababu.in