इस पेज में आपका स्वागत है

यदि जातिगत भेदभाव नहीं, तो UGC Guidelines 2026 से डर कैसा?
यदि जातिगत भेदभाव नहीं तो UGC Guidelines 2026 से डर कैसा? – UGC Guidelines 2026 को लेकर अकादमिक जगत में खलबली क्यों है? सवाल सीधा है—अगर वास्तव में जातिगत भेदभाव नहीं होता, तो जवाबदेही का डर कैसा? पढ़िए, कैसे ये नई गाइडलाइन्स कैंपस के ‘अदृश्य जातिवाद’ और मेरिट के नाम पर चल रहे विशेषाधिकार पर रोशनी डाल रही हैं।

आदिवासी आज भी न्याय से दूर क्यों?
आदिवासी आज भी न्याय से दूर क्यों? इस लेख में हम सामाजिक भेदभाव, प्रशासनिक लापरवाही, कानून की जटिलता और अधिकारों की अनदेखी जैसे कारणों को गहराई से समझेंगे और समाधान की दिशा भी देखेंगे।

पत्थलगड़ी-स्मृति स्तंभ,गणराज्य सीमा,स्वशासन
पत्थलगड़ी-स्मृति स्तंभ,गणराज्य सीमा,स्वशासन, आदिवासी परंपरा में सिर्फ यादगार नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और गांव के स्वशासन का प्रतीक है।
महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले
महात्मा ज्योतिबा फुले एक क्रांतिकारी समाज सुधारक थे जिन्होंने बालिका शिक्षा, जातिवाद और अंधविश्वास के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। इस लेख में उनके जीवन की
सच्चाई, सेंसर और संवेदनशीलता: फिल्म ‘Phule’
भारत का सामाजिक ताना-बाना जाति व्यवस्था के इतिहास से अनछुआ नहीं रहा है। विशेषकर 19वीं सदी के समाज सुधारकों—महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले—ने उस
आदिवासियों का मसीहा – “डॉ. भीमराव अंबेडकर”
“डॉ. भीमराव अंबेडकर” डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन न केवल एक प्रेरणा है, बल्कि वह संघर्ष, आत्मबल और सामाजिक परिवर्तन की जीवंत मिसाल भी